Jai Prakash Narayan – लोक नायक जय प्रकाश नारायण

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Jai Prakash Narayan –  लोक नायक जयप्रकाश नारायण  का जीवन परिचय 

 

अक्सर हम कहते हैं कि अकेला इंसान क्या कर सकता है, लेकिन यदि हम अपने देश के वीर क्रांतिकारियों के बारे में जानेंगे तो हमें पता चलेगा कि उन्होंने अकेले ही लड़कर देश को आजाद करवाया, तब उन्होंने ये नहीं सोचा कि मेरे साथ कौन अपनी जान की बाज़ी लगाएगा या मेरे साथ कौन जेल जाएगा।

 

उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपनी मातृभूमि व देश की आजादी के बारे में सोचा। ऐसे ही एक देशभक्त, समाज सुधारक राजनेता थे  Jai Prakash Narayan

जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनके कार्यों और इनके बलिदानों को आज भी पूरा देश याद करता है, इसलिए इन्हें ‘Loknayak Jayprakash Narayan’ कहकर सम्मानित भी किया गया। आज हम आपको इन्हीं महान हस्ती के पूरे जीवन और कार्यों के बारे में कई रोचक बातें बताने जा रहे हैं।

 

Lok Nayak Jai Prakash Narayan जी का शुरुआती जीवन, परिवार और शिक्षा

 

इन महान देशभक्त Jai Prakash Narayan  ने 11 अक्टूबर, 1903 के दिन बिहार स्थित सारण जिले के सिताबदियारा नामक स्थान पर जन्म लिया। वे एक कायस्थ परिवार से ताल्लुक रखते थे। इनके पिताजी हरसु दयाल श्रीवास्तव जी राज्य सरकार के कैनल विभाग में नौकरी किया करते थे और माताजी फूलरानी देवी उच्च विचारों वाली एक गृहणी थीं।

 

इनकी शुरुआती शिक्षा बिहार में ही पटना से ही हुई। Jayaprakash Narayan को प्रारंभ से ही किताबें व लेख पढ़ने में बहुत रुचि थी। अपने विद्यार्थी जीवन में इन्होंने कई किताबें और पत्र पत्रिकाएं पढ़ीं, साथ ही भगवदगीता का भी गहन अध्ययन किया, जिससे इनका ज्ञान और बुद्धि कौशल और अधिक बढ़ा, वे महान लेखक मार्क्स के विचारों से काफी प्रेरित हुए।

 

बिहार से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद इन्होंने अपनी बाद की शिक्षा अमेरिका की बरकली यूनिवर्सिटी से पूरी की, जहां इन्होंने समाजशास्त्र विषय में स्नातक किया और स्नातकोत्तर की डिग्री भी प्राप्त की। तत्पश्चात Jai Prakash Narayan डॉक्टर की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन जब इन्हें ज्ञात हुआ कि इनकी मां अस्वस्थ हैं, तब वे पढ़ाई छोड़ पुनः अपने वतन हिंदुस्तान में आ गए।

 

जब वे 18 वर्ष के थे तब विवाहबंधन में बंधे। इनकी जीवनसंगिनी का नाम प्रभावती देवी था। जब जयप्रकाश जी का विवाह हुआ, तब उनकी शिक्षा पूरी नहीं हुई थी, अतः वे अपनी पत्नी के साथ नहीं रह पाए थे। इनकी पत्नी गांधीजी के आश्रम में ही रहने लगी थीं। जयप्रकाश जी बचपन से ही वतनप्रेमी थे और देश को आजाद करवाने की प्रबल इच्छा रखते थे।

 

राजनीतिक जीवन और आजादी में इनका योगदान

 

अपने देश वापस आने के पश्चात् इन्होंने कुछ समय तक तो बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर रहकर अध्यापन कार्य किया, लेकिन इन्हें अपने जीवन और भविष्य से ज्यादा देश के भविष्य की चिंता थी, अतः अपनी नौकरी छोड़कर जयप्रकाश जी गांधी जी देश को आजाद करवाने में जुट गए।

 

इन्होंने गांधी जी के साथ कई महत्वपूर्ण आंदोलनों जैसे सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आन्दोलन में भी हिस्सा लिया। अपने इन क्रांतिकारी कार्यों की वजह से ये कई बार जेल भी गए।

 

जब अंग्रेजों ने इनको नासिक जेल में डाला तब ये कई बड़े नेताओं से भी मिले, जिन्होंने इनके जीवन और विचारों पर अपनी छाप छोड़ी तथा इन्होंने राजनीति की ओर अपना रुख किया।

जयप्रकाश जी कांग्रेस सोसलिस्ट पार्टी के महासचिव बने।

 

जब इन्होंने गांधीजी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रहकर देश के लिए लड़ाई की और भारत के नागरिकों को आजादी के लिए जागरूक किया तब भी अंग्रेजी सरकार ने इन्हें हजारीबाग जेल में बंद करवा दिया था। वहां पर भी वे कई देशभक्त क्रांतिकारियों से मिले और मौका देखकर जेल से भाग गए।

 

इनका सम्पूर्ण क्रान्ति आंदोलन

 

Lok Nayak Jai Prakash Narayan स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय रूप से कार्य करते रहे और देश को आज़ादी दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश को आज़ादी दिलाने के बाद भी इन्होंने देशसेवा करना नहीं छोड़ा। आजादी के बाद भारत देश की जर्जर हालत को सुधारने के लिए भी दिलोजान से लगे रहे।

 

इन्होंने निडरता से हर समस्या का सामना किया। वे आचार्य विनोबा भावे जी के साथ सर्वोदय आंदोलन में भी जुड़ गए थे। इनको ‘ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन’ का अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया, इस पद पर वे 5 वर्ष तक रहे।

 

Jai Prakash Narayan जी ने देश की बिगड़ी हुई आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए देश के नागरिकों को जागृत करना प्रारंभ किया। उन्होंने कई जगह पर जनता के साथ मिलकर आंदोलन किये और जुलूस निकाले।

 

उन्होंने पटना में सन 1974 में एक मौन जुलूस निकाला, इसमे कई लोगों ने भाग लिया। इस जुलूस में लोगों को प्रशासन द्वारा डंडों से पीटा भी गया। जयप्रकाश जी का यही जनांदोलन बाद में बड़े तौर पर सारे देश में फैल गया और ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जिसमें नागरिकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

 

Jai Prakash Narayan और इंदिरा गांधी का इस्तीफा

 

जयप्रकाश नारायण जी जानते थे कि देश की अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलने के लिए एक अच्छी सरकार की जरूरत है। वे पहले कांग्रेस पार्टी का समर्थन करते थे, परन्तु जब देश की बागडोर इंदिरा गांधी जी की सरकार के हाथ में आई तो देश की हालत बिगड़ती चली गई। भारत में गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं ने विकराल रूप ले लिया।

 

तत्कालीन इंदिरा गांधी जी की सरकार अनैतिक और अलोकतांत्रिक तरीकों से सरकार चलाती थी, जो कि जयप्रकाश जी को कदापि मंजूर नहीं था। वे अपने देश के स्तर को ऐसे गिरता हुआ नहीं देख सकते थे अतः इन्होंने अपने साहस और निडरता का परिचय देते हुए इंदिरा गांधी जी और उनके साथ ही कई और नेताओं से इस्तीफ़ा देने की माँग की, साथ ही उनके किये सभी निर्णयों को मानने से भी इनकार कर दिया। ऐसा करने पर जयप्रकाश नारायण जी की गिरफ्तारी का फरमान जारी हुआ और साथ ही देश में आपातकाल भी लागू किया गया। उसके 2 साल बाद इंदिरा गांधी जी को उनके पद से हटा दिया गया।

 

फिर चुनाव किये गए और इस बार जयप्रकाश नारायण जी ने भारतीय जनता पार्टी का गठन करके चुनाव में जीत हासिल की। वास्तव में उन्होंने लोकनायक की उपाधि को चरितार्थ किया।

 

Jai Prakash Narayan का स्वर्गवास

 

जिस समय जयप्रकाश नारायण जी को आपातकाल में गिरफ्तार करके कारावास में बंदी बनाया गया था, उस दौरान जेल में रहने से उनकी तबियत खराब हो रही थी। फिर जब 12 नवम्बर 1976 को उन्हें जेल से आज़ाद भी कर दिया गया, तब चेकअप करवाने से उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी किडनी खराब हो गई है। फिर उनका इलाज चला। बाद में उन्हें डायबटीज ओर हृदय रोग भी हो गया, जिसके कारण 8 अक्टूबर 1979 को पटना में उनका स्वर्गवास हो गया और सारा देश उनकी याद में शोकाकुल हुआ।

 

उपलब्धियां

 

जयप्रकाश जी ना सिर्फ महान देशभक्त और राजनेता रहे, बल्कि उन्होंने आजीवन मातृभूमि की सेवा में स्वयं को समर्पित कर दिया था। वे देश को ना सिर्फ आजाद करवाना चाहते थे, वरन उसका संपूर्ण विकास चाहते थे और इसी हेतु कार्य करने में प्रवृत्त थे।

 

स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण जी को सन 1998 में भारतरत्न देकर सम्मानित किया गया था। सन 1965 में उनको मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा इनको FIE फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रभूषण अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।

 

इनकी याद में कई अस्पताल व संस्थाओं का नाम रख गया। बिहार के छपरा जिले में इनकी याद में जेपी यूनिवर्सिटी का नाम रखा गया। दिल्ली और पटना में इनके नाम से अस्पताल खुलवाये गए।

 

इनके नाम पर जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रामा सेंटर भी बनाया गया। इन महान विभूति के व्यक्तित्व और विचार आज भी देश के युवाओं को प्रेरित करते हैं। आज देश को इनके ही जैसे निडर और सेवाभावी राजनेता की आवश्यकता है।

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