mother teresa

मदर टेरेसा का जीवन परिचय | Mother teresa in hindi

 

Mother teresa in hindi | मदर टेरेसा की जीवनी | मदर टेरेसा का जीवन परिचय 

 

मदर टेरेसा का जीवन परिचय

दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते है जो इस दुनिया से जाने का बाद भी अपनी एक छाप छोड़ जाते हैं । क्योंकि इन लोगों ने अपने जीवन काल में ऐसे काम किए होते है है जिनके कारण उनके इस दुनिया से जाने के बाद भी लोग उन्हें याद करते है ।

उन्हीं महान आत्माओं से एक थी मदर टेरेसा जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन गरीब व असहाय लोगों की सेवा तथा परोपकार में लगा दिया ।

 

प्रारंभिक जीवन 

 

मदर टेरेसा का जन्म उस्मान साम्राज्य में हुआ को आज के समय में सोप्जे, मेसेडोनिया गणराज्य में पड़ता है। मदर टेरेसा का नाम आन्येज़े गोंजा बोयाजियू था व उनके पिता का नाम निकोला बोयाजू था को एक साधारण व्यापारी थे ।

उनकी मात्र भाषा या अलबेनियन भाषा में गोंजा शब्द का अर्थ एक फूल कि कली होता है, उनके जीवन पर यह शब्द सार्थक भी होता है ।

 

उनके प्रारंभिक जीवन में ही उनके पिता का देहांत हो गया था जब उनका पिता का देहांत हुआ तो मदर टेरेसा कि उमर मात्र 8 साल की थी । जिसके बाद मदर टेरेसा का पालन पालन उनकी माता ने है किया । 

मदर टेरेसा के माता पिता की कुल पांच संताने थी जिनमें से दो बचपन में ही गुजर गई थी । मदर टेरेसा के जन्म के समय उनकी बड़ी बहन की उम्र 7 साल की थी तथा उनके नहीं को उमर 2 साल की थी ।

मदर टेरेसा अपने बचपन के समय से ही परिश्रमी तथा अध्ययनशील थी तथा अध्यन के साथ उनकी संगीत में भी काफी रुचि थी ।

उनके घर के पास के गिरजाघर में में मदर टेरेसा तथा उनकी बहन प्राथनाएं गया करती थी । उनके प्रारंभिक जीवन से ही लगने लग गया था कि ये अपना जीवन भगवान कि सेवा तथा परोपकार में लगाएंगी । इसके बाद में उन्होंने अपने जीवन का अहम फैसला 18 साल की उम्र में ही ले लिया और उन्होंने निश्चय कर लिया कि वो ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होगी । 

ये फैसला लेने के बाद में मात्र 18 साल की उम्र में ही वो अंग्रेजी भाषा का ज्ञान लेने के लिए आयरलैंड चली गई ।

 

mother teresa in hindi | mother teresa biography in hindi | mother teresa life history in hindi

 

मदर टेरेसा का भारत में आगमन 

 

वर्ष 1929 में मदर टेरेसा भारत आ गई और उसके के दार्जिलिंग हिमालय की गोद में रहकर उन्होंने उन्होंने शिखा तथा यहां बंगाली भाषा का ज्ञान लिया । इसके बाद में वो कोलकाता आ गई और शिक्षण कार्य में जुट गई तथा 

वर्ष 1944 में उन्हें हेडमिस्ट्रेस के पद से नवाजा गया ।

 

मानव सेवा का संकल्प 

 

मदर टेरेसा ने  अपना पूरा ध्यान बच्चों को पढ़ाने में लगा दिया था लेकिन उनका मन कई बार विचलित हो जाता था जब वह अपने आस पास गरीब तथा असहाय लोगों की देखा करती थी तो क्योंकि वर्ष 1943 में अकाल पड़ा था जिसके कारण चारों तरफ सिर्फ एक ही मंजर नजर आता था ।

मदर टेरेसा जब उन भूखे प्यासे गरीब असहाय लोगों को देखती थी तो उनका मन पूरी तरह से विचलित हो जाता था । यह चल ही रहा था कि इसके बाद की घटना 1946 के कोलकाता की हिंदू-मुस्लिम दंगों ने तो शहर की हालत को बहुत बुरी तरह से डराने वाला बना दिया था । 

इन सभी घटनाओं ने मदर टेरेसा के मन की स्थिति को काफी विचलित कर दिया और इन्हीं घटनाओं से प्रेरित होकर  वर्ष 1946 मदर टेरेसा ने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा और गरीबों की सेवा में लगाने का संकल्प लिया ।

 

इसके बाद में मदर टेरेसा ने वर्ष 1946 में ही बीमार और बेसहारा लोगों की सेवा के लिए जरूरी नर्सिग ट्रेनिंग करने का फैसला लिया और वह पटना में चली गई और वहां पर उन्होंने 

होली फॅमिली हॉस्पिटल आवश्यक नर्सिग ट्रेनिंग को पूरा किया और वर्ष 1948 में नर्सिग ट्रेनिंग को पूरा करके वो कोलकाता आ गई ।

 

मदर टेरेसा की जीवनी | mother teresa in hindi

 

 

मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ की स्थापना

 

वर्ष 1948 में कोलकाता आने के बाद मदर टेरेसा ने अपना पूरा ध्यान लोगों के सेवा में लगा दिया । वो मरीजों के घाव धोती थी उन्हें मरहम पटी बांधती थी तथा बुजुर्ग लोगों व असहाय लोगों की देखभाल करने लग गए । 

इसी समय में उनके मन में ‘मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ स्थापना करने का आया क्योंकि संस्था का काम गरीब, असहाय, तथा बीमार लोगों की सहायता करना होता है,  जिसमें निर्वस्त्र लोगों को वस्त्र प्रदान करना, भूखे लोगों को खाना खिलाना, और लोगों को दवाइयां उपलब्ध करवाना और इनका इलाज करना आदि सब चीजें शामिल थी । और आखिरकार उनके प्रयासों को सफलता मिली और 7अक्टूबर 1950 को उन्हें वेटिकन से मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ को स्थापित करने के लिए अनुमति मिल गई ।

 

सम्मान तथा पुरस्कार 

 

मदर टेरेसा एक महान समाज सेवक थी जिसने गरीबों, बेघरों तथा अशहाय लोगों की सेवा में अपना जीवन अर्पित कर दिया । इसलिए उनको चाहे जितने पुरस्कार व सम्मानों से नवाजा जाएं वो सभी कम ही है ।

मदर टेरेसा के द्वारा किए गए कार्यों के लिए उन्हें बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मान से नवाजा गया जो इस प्रकार है :- 

  • भारत सरकार ने उन्हें पदम श्री पुरस्कार से 1962 में नवाजा ।
  • भारत के सर्वोच्च सम्मान पुरस्कार भारत रत्न से 1980 में उन्हें नवाजा गया।
  • अमेरिका ने वर्ष 1985 में “मेडल ऑफ फ्रीडम” पुरस्कार से सम्मानित किया ।
  • मानवता के लिए किए गए कल्याण कार्य के लिए उन्हें वर्ष 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया । 
  • उनकी मौत के बाद में वर्ष 2003 में पोप जॉन द्वितीय ने उन्हें “धन्य” घोषित किया

 

Mother Teresa bharat ratna
Mother Teresa awarded Bharat Ratna

 

मृत्यु 

 

हम सब जानते हैं कि इस सृष्टि का नियम है कि जो यहां पर आता है उसे जाना भी निश्चित है चाहे वह कोई भी हो और इसी नियम के तहत मदर टेरेसा को इस लोक से परलोक जाना पड़ा । उम्र के बढ़ते प्रभाव के कारण मदर टेरेसा का स्वास्थ्य भी बिगड़ने लग गया और इसी के चलते 1983 में 73 वर्ष की आयु में उनको  दिल का दौरा पड़ा ।

इसके कुछ सालों के बाद में फिर उनको 89 साल की उम्र में उन्हें दिल का दौरा दोबारा से पड़ा । धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य बिगड़ता गया और 1991 में उन्हें निमोनिया हो गया और उनके दिल से संबंधित परेशानी और बढ़ गई। के बाद लगातार उनकी सेहत गिरते गई और 5 सितंबर 1997 को मौत हो गई ।

 

Leave a Comment