NRI CHAIWALA

विदेश में लाखों की नौकरी छोड़ वापस आ कर बेचने लगा चाय, आज है करोड़ों का टर्नओवर 

 

अगर मेहनत और सच्ची लगन हो तो, इंसान वो सब कुछ हासिल कर सकता है। जिसकी उसने कल्पना की है। ज़िन्दगी में हम सब की चाहत होती है कि, पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अच्छी सी नौकरी मिल जाए। नौकरी मिलने के बाद हम उसी में लगे रहते है, लेकिन जगदीश कुमार ने ऐसा नहीं किया। जगदीश का भी सपना था कि एक अच्छी नौकरी मिल जाए, और उन्हें न्यूजीलैंड में लाखों की सैलरी वाली एक नौकरी मिल भी गई। 20 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने वो नौकरी छोड़ दी और इंडिया वापस आ गए। वापस आने के बाद उन्होंने चाय बेचने का फैसला किया। जी हां, लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ जगदीश चाय बेचना चाह रहे थे! विरोध के बावजूद उन्होंने चाय बेचना शुरू किया। देखते ही देखते उनके चाय का बिजनेस आगे बढ़ता गया और आठ महीने के अंदर ही उन्होंने 1 करोड़ का मुनाफा हासिल कर लिया। जगदीश कुमार आज पूरे देश में NRI Chaiwala  के नाम से मशहूर हो चुके हैं। जगदीश की कहानी हर उस शख्स को जाननी चाहिए, जिन्हें लगता है कि छोटे स्तर से शुरू कर के बड़ी कामयाबी नहीं मिल सकती! तो चलिए जानते हैं कैसे जगदीश कुमार बने एनआरआई चायवाला! 

 

चाय का बिजनेस शुरू करने से पहले जगदीश कुमार क्या करते थे?

 

अधिकतर भारतीय लोगों की तरह जगदीश कुमार का जन्म भी एक निम्न मध्य वर्गीय परिवार में हुआ था। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो 3400 की सैलरी पर नौकरी करने लगे। कुछ समय बाद विदेश में नौकरी मिल गई। अरब देशों में कुछ साल नौकरी करने के बाद उन्हें न्यूजीलैंड में नौकरी मिली और साथ ही फैमिली के लिए ग्रीन कार्ड भी मिल गया। जगदीश फैमिली के साथ न्यूजीलैंड में ही सेटल हो गए। अपने कैरियर में उन्होंने कई बड़े होटल में नौकरी की। 20 साल नौकरी करने के बाद जब वो अपने कैरियर के शिखर पर थे, तब उन्होंने भारत में अपना कोई बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। 2018 में जगदीश नौकरी से इस्तीफा दे कर इंडिया वापस आ गए। 

 

चाय के बिजनेस की शुरुआत कैसे हुई? 

 

जगदीश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से काफी ज्यादा प्रभावित हैं और वो उन्हें अपना आदर्श भी मानते हैं। जगदीश प्रधानमंत्री द्वारा चलाए जा रहे मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया इत्यादि कार्यक्रमों से काफी ज्यादा प्रभावित हैं। चूंकि, प्रधानमंत्री मोदी भी बचपन में चाय बेचा करते थे। इसी वजह से जगदीश ने मोदी जी के नक्शे क़दम पर चलने का फैसला किया। 

 

भारत आने के बाद जगदीश भारतीय चाय बाजार में संभावना की तलाश में देश भ्रमण पर निकल पड़े। देश की सैर करने के बाद उन्हें चाय के बाजार को समझने में मदद मिली, और साथ ही उन्हें शुरू कहां से करना है, इसकी भी जानकारी मिल गई। 

 

जगदीश ने अपने बिजनेस की शुरुआत के लिए नागपुर और असम का चयन किया। असम चायपत्ती उत्पादन के लिए मशहूर है। इस वजह से इस जगह से जगदीश को अलग अलग किस्म की चायपत्ती आसानी से मिलने लगी। नागपुर में इन्होंने अपना पहला चाय काउंटर खोला। 

 

काउंटर खोलने से पहले जगदीश ने कुछ बड़ी कंपनियों से संपर्क किया और उनके ऑफिस में चाय काउंटर खोलने की इच्छा जताई, लेकिन इन्हें कहीं से भी समर्थन नहीं मिला। फिर क्या, जगदीश उन ऑफिस के सामने ही चाय की दुकान लगा कर बैठ गए। 

 

जगदीश को शुरू से ही अपनी चाय पर भरोसा था। उनके चाय की कप लोगों के भरोसे पर भी खड़ा उतरा। देखते ही देखते लोग जगदीश के चाय के दीवाने हो गए। लोगों की बीच अपने चाय की पहचान बनते देख, जगदीश ने अपनी दुकान पर NRI Chaiwala नाम का बैनर लगा लिया। अनोखे बैनर को देख लोग इनकी चाय की ओर खिंचे चले आने लगे। और इस तरह से जगदीश कुमार की पहचान एनआरआई चायवाला के रूप में बन गई। ये तो मंजिल की ओर उठा बस एक कदम था, अभी जगदीश का पूरा सफर बाकी था। 

 

मम्मी के हाथ की चाय से ले कर मर्दों वाली चाय तक! 

 

हमारे देश में चाय सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं है बल्कि ये रिश्ते बनाने से ले कर दोस्ती निभाने तक का काम करता है। और तो और छोटी छोटी बीमारियों में चाय इलाज के रूप में हमारे सामने आ जाता है। जगदीश चाय के साथ लोगों के इमोशन को अच्छे से समझते थे। इसलिए उन्होंने विभिन्न तरीकों की चाय डेवलप की है। एनआरआई चायवाला की दुकान पर अलग अलग स्वाद और गुणवत्ता वाली कुल 35 तरह की चाय उपलब्ध है। इनमें से कुछ प्रमुख मर्दों वाली चाय, प्यार मुहब्बत वाली चाय, मम्मी के हाथ वाली चाय, दोस्तों वाली चाय, बच्चों की चाय इत्यादि है। हाल फिलहाल इन्होंने एंटी कोरोना ब्रह्मास्त्र चाय भी डेवलप की है। ये चाय इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। 

 

अलग अलग स्वाद वाली चाय बनाने के लिए जगदीश चाय की विभिन्न किस्म की पत्तियों को मिक्स कर के नया फ्लेवर तैयार करते हैं। इसके अलावा जगदीश अपनी चाय में एक स्पेशल चाय मसाला भी डालते है। यह चाय मसाला NRI Chaiwala की स्पेशल सिक्रेट है। इस मसाले को जगदीश खुद अपने हाथों से तैयार करते हैं। एनआरआई चायवाला के पास हर उम्र के लोगों के लिए स्पेशल चाय है। शहर के अनुसार भी चाय के फ्लेवर में बदलाव भी किया जाता है। इनके चाय की शुरुआती कीमत सिर्फ 10 रुपए है। 

 

शुरुआती सफलता मिलने के बाद मई 2019 में जगदीश ने Corpbite Unit of MGJ Restaurant India Pvt Limited नाम से अपने कंपनी की शुरुआत की।  कंपनी की शुरुआत के बाद से एनआरआई चायवाला की दुकान कई शहरों में खुल चुकी है और कई शहरों में काम भी चल रहा है। चाय के साथ ही जगदीश के पास 11 फूड ब्रांड्स भी है। जिनमें चाट हाउस, मोटूलाल भटूरेवाला, अनलिमिटेड 24 इत्यादि है। 

 

एनआरआई चायवाला के चाय की सप्लाई एचसीएल और इंफोसिस जैसी आईटी कंपनी में हो रही है तो वहीं कई कॉरपोरेट ऑफिस में भी एनआरआई चायवाला की कैटरिंग है।

 

जगदीश ने चाय बेच कर ही सिर्फ आठ महीने में 1.2 करोड़ का मुनाफा हासिल किया है। जगदीश भारत के हर शहर में NRI Chaiwala को पहुंचाना चाहते हैं।

 

 

 

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