Salasar Balaji – श्री सालासर बालाजी धाम

salasar dham

Salasar Balaji

भारत धार्मिक देशों में से एक है,  यहां पर हर राज्य में बहुत से धार्मिक स्थान है। भारत का एक राज्य जहां पर बहुत सारे मंदिर है जहां पर बहुत से देवी देवताओं का स्थान है, वह है राजस्थान राज्य।

राजस्थान में बहुत से शहरों में बहुत से धार्मिक स्थान है, यहां पर खाटू श्याम जी, ब्रह्म मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थान भी है। राजस्थान में एक मंदिर ऐसा भी है जिसकी बहुत मान्यता है वह Salasar Balaji Mandir यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

यहां के मंदिर की  अपार धारणा और शक्ति मानी जाती है, Salasar Balaji Mandir मे हर साल मेला लगता है।

यहां पर श्रद्धालुओं के लिए बहुत सारी धर्मशालाए बनाई गई है, और रुकने वाले लोगों के लिए खाने पीने के बहुत से रेस्टरों  भी बनाए गए हैं। हर साल यहां पर अनगिनत भारतीय भक्त दर्शन के लिए सालासर धाम आते हैं।

हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन और पूर्णिमा पर यहां पर बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है।

यह भारत का एकमात्र balaji का मंदिर है जहां बालाजी के दाढ़ी और मूंछ है।

हमने ज्यादातर बालाजी के मंदिर देखे हैं वहां पर राम भक्ति के लिए हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ा हुआ रहता है। माना जाता है कि सालासर मंदिर का निर्माण मुसलमान कारीगर द्वारा किया गया था।  इसमें से फतेहपुर के नूर मोहम्मद और दाऊ थे।

 

Salasar Mandir  – सालासर मंदिर  

सालासर मंदिर राजस्थान के चुरू जिले में सालासर कस्बे में है। सालासर मंदिर जयपुर बीकानेर हाईवे पर स्थित है।

सालासर का मंदिर सीकर जिले से 57 किलोमीटर दूर है और सुजानगढ़ से 24 किलोमीटर दूर है और लक्ष्मणगढ़ से 30 किलोमीटर दूर है।

सालासर गांव सुजानगढ़ की पंचायत समिति के अंतर्गत आता है।  यहां पर राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा बसें चलाई जाती है जो कि दिल्ली जयपुर बीकानेर सभी से जुड़ी हुई है।  यहां पर इंडियन एयरलाइंस और जेट एयर सेवा भी है जो जयपुर तक उड़ान भर्ती है।

सालासर जाने वाले लोगों के लिए जयपुर तक आना पड़ता है।  उसके बाद मे Salasar  Balaji पहुंचने के लिए टैक्सी बस से जाना पड़ता है।  इसके लिए 3 घंटे का समय लग जाता है।

सालासर बालाजी के लिए ट्रेन की सुविधा भी दी गई है।  वहां पर सुजानगढ़, सीकर, डीडवाना, जयपुर, रतनगढ़ आदि। सालासर बालाजी का मंदिर पिलानी शहर से 40 किलोमीटर दूर पड़ता है।

 

Salasar Balaji की मूर्तिया

 

कहा जाता है कि  सावन शुक्ल पक्ष नवमी के दिन एक चमत्कार हुआ था।  कहा जाता है कि नागौर जिले में छोटा गांव के अंदर एक जाट किसान का खेत था, जो खेत जोत रहा था अचानक खेत जोतते समय हल की नोक बड़ी चट्टान से टकराई।  जिसकी आवाज बहुत तेज से गूंज रही थी।

जब किसान ने उस खेत की जमीन को खोदना शुरू किया तो उसके अंदर से मिट्टी से लथपथ दो मूर्तिया निकली थी। उस समय उसकी पत्नी किसान के लिए खाना लेकर वहां पहुंची थी और किसान की पत्नी ने उन मूर्तियो देखा।

जब किसान की पत्नी ने भगवान की मूर्ति को देखा तो अपनी साड़ी से साफ किया। यह मूर्तियां Salasar  Balaji की थी। जैसे ही इस बात की खबर पूरे गांव में फैल गई तो इस बात की खबर असोटा गांव के ठाकुर ने भी सुनी और उसी रात बालाजी ने आकार सपने में आकर उन्हें यह आदेश दिया था कि इस मूर्ति को सालासर यानी चूरु जिले में स्थित एक गांव है वहां पर भेज दिया जाए।

उसी रात को हनुमान जी के भक्त जिनका नाम मोहन दास जी था।  उन्होंने सपने में देखा कि बालाजी स्वयं प्रकट हुए हैं और उन्होंने आसोटा की मूर्ति के बारे में बताया है।

उन्होंने इस बात का संदेश आसोटा के ठाकुर को भिजवाया। जब ठाकुर को इस बात का पता चला तो वह चौक गए की इस बात का पता मोहनदास जी को कैसे हुआ और जब इस बात का पता चला कि मोहनदास जी को इस बात पर थोड़ा बहुत ज्ञान है तो यह बात सभी के लिए आश्चर्यचकित वाली थी।

बाद में मूर्ति को सालासर धाम भेज दिया गया और फिर सालसर धीरे-धीरे सालासर धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दूसरी मूर्ति को पाबोलाम जो कि 25 किलोमीटर दूर है वहां पर स्थापित किया गया।

जब सालासर बालाजी के मेले का आयोजन होता है तो सबसे पहले सुबह सुबह पाबोलाव मे  आयोजन होता है फिर दिन के समय में सालासर धाम पर आयोजन किया जाता है।

 

Salasar Dham धार्मिक स्थान

Salasar  Balaji के मंदिर को धार्मिक स्थानों में गिना जाता है, यहां पर भगवान बालाजी की मूर्ति है तथा यहा पर महान भक्त मोहन दास जी ने पवित्र अग्नि जलाई थी जोअग्नि आज भी जल रही है।

हिंदू धर्म के बहुत से श्रद्धालु यहां पर तीर्थयात्री के रूप में आते हैं और यहां से यहां की राख ले जाते हैं। सालासर बालाजी के मंदिर के पास मोहन मंदिर है जो बहुत ही प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर मोहनदास जी और कनी दादी के पांव के निशान आज भी मौजूद है।

Salasar  Dham  को इन दोनों की पवित्र भावों और इन दोनों की पवित्र भक्ति के लिए भी जाना जाता है।  यहां पर इन दोनों की समाधि बनाई गई है।

कहा जाता है कि पिछले 8 सालों से यहां पर रामायण का पाठ किया जाता है। बालाजी के मंदिर में लगभग 20 सालों से लगातार अखंड हरिकीर्तन और राम नाम के निरंतर जाप किए जाते हैं।

यहां पर एक दुसस्र मंदिर है जो कि अंजनी माता का मंदिर है जो लक्ष्मणगढ़ की ओर सालासर धाम से 2 किलोमीटर दूर पर है।

अंजली माता भगवान हनुमान जी की माता है। यहां पर श्याम मंदिर भी स्थित है जो कि सालासर मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूरी पर है।

यहां पर एक मंदिर ऐसा भी है जो कि 1100 साल पुराना है और दर्शन योग्य है यह मंदिर शयनन माता का मंदिर है। यह मंदिर बहुत ही ऊपर पहाड़ियों पर स्थित है।  यहां पर जाने के लिए 15 किलोमीटर रेगिस्तानी इलाके से गुजरना पड़ता है।

 

मेले का आयोजन

सालासर धाम में हर साल मेले का आयोजन किया जाता है।  यह हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। हर साल हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल चतुर्दशी और पूर्णिमा को मनाया जाता है।

यहां पर हर साल भारत के  हर एक कोने से पहुंचे श्रद्धालु हनुमान जयंती मनाने के लिए सालासर बालाजी आते हैं।  यहां पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है और बहुत ही बड़ी संख्या में यहां पर भक्त आते हैं।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन यह मेला बाकी मेलों से बहुत ही आकर्षित होता है। हनुमान जयंती के दिन इस अवसर पर मुफ्त में भोजन मिठाइयां और खाने की चीजें और पीने की चीजें को बाती जाती है। सालासर धाम मंदिर का रखरखाव मोहनदास जी ट्रस्ट के द्वारा किया जाता है।

यहां पर बहुत सी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है जैसे कि मंदिर के अंदर बिजली के लिए जनरेटर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है अच्छे पानी के लिए फिल्टर लगाया गया है ताकि कस्बे के लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराया जा सके।

Salasar Balaji का इतिहास

सालासर बालाजी धाम राजस्थान में एक सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों में से एक है।  यह सालासर गांव में स्थित है।  यहां पर बालाजी की प्रतिमा स्थापित की गई है।  यहीं से कुछ दूर पर एक और बालाजी की प्रतिमा स्थापित की गई है।

यह दोनों प्रतिमाएं एक साथ में ही स्थापित की गई थी। माना जाता है कि Salasar Dham चूरू जिले के अंदर आता है परंतु इस धाम की रोचक कथा सबको आश्चर्यचकित कर देती है।

कहा जाता है कि बालाजी के सबसे बड़े भक्त मोहन दास जी थे और इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर बालाजी को दर्शन दिये।  इन्हें मूर्ति के रूप मे आने का संकेत दिया। कुछ दिनों के बाद जब एक जाट का  परिवार जो की खेती करता था।

जब जाट अपने खेत में जोत रहा था तो उसके हल की  नॉक किसी कठोर चीज से टकराई उसकी गूंज इतनी तेज थी कि चारों तरफ गूंजने लगी। फिर जाट ने उस स्थान को खोदना शुरू किया तो कुछ दो मूर्तियां जो कि रेतो  से लथपथ थी।  फिर जाट ने उन्हें बाहर निकाला।

जब जाट की पत्नी ने यह देखा तो उन्हें अपने साड़ी से साफ किया तो दोनों बालाजी की ही मूर्तियां थी।  बाद मे इस बात का पता असोटा गांव के ठाकुर को पता चला और जब उन्होंने मोहन दास जी की कहानी सुनी तो आश्चर्य चकित रह गए।

गांव के ठाकुर के सपने में आया कि इन मूर्तियों को सालासर गांव में स्थित किया जाए।

जब किसान द्वारा मूर्तियों को पहला भाग बाजरे के चूरमे में से लगाया गया तो इसे बालाजी का भोग माना जाने लगा।  उसके बाद से ही Salasar Balaji को चूरमे का भोग लगाया जाता है।

कहा जाता है कि जब यह मूर्तियां प्रकट हुई तब आसोटा  गांव के ठाकुर के सपने में मूर्तियों को सालासर ले जाने की बात सामने आयी और दूसरी तरफ बालाजी के भक्त मोहन दास जी के सपने में आने की कहानी सामने आयी।  फिर इन मूर्तियों को बैलगाड़ी से सालासर तक पहुंचाया गया।

कहां गया कि जहां पर बेल गाड़ियां खुद अपने आप रुक जाएगी वहीं पर इन मूर्ति की स्थापना करनी है। आज मूर्तियां उसी जगह पर स्थापित की गई है जहां पर बेल गाड़ी रुकी थी।

यह मूर्तियां सबसे अलग है क्योंकि यहां पर सालासर धाम में हनुमान जी की मूर्ति पर मूंछ और दाढ़ी है जो कि किसी भी अन्य मंदिरों में नहीं है।  इस खास प्रतिमा के दर्शन के लिए हर साल लाखों करोड़ों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

Salasar Dham में पेड़ पर नारियल बांधने का रिवाज

कहां जाता है कि Salasar Balaji के मंदिर में एक बहुत ही बड़ा पेड़ ।  जहां पर लोग नारियल को मोली के साथ में बांधते हैं।  यह एक रिवाज माना जाता है।  यहां पर बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और नारियल को उस पेड़ के बांधते हैं।

कहा जाता है कि यदि कोई भक्त नारियल को पूरे विश्वास के साथ में इस पेड़ पर बांधते है तो उसके द्वारा मांगी गई जो भी मनोकामना है वह जरूर पूरी होती है। यहां के चमत्कार के कारण इस मान्यता को बहुत ही श्रद्धा और पवित्रता के साथ में माना जाता है।

बुटाटी धाम जहां मात्र परिक्रमा देने से ही लकवा ठीक हो जाता है।  

 

सालासर धाम का महत्व

Salasar Dham भारत में इस लिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां पर हनुमान जी की प्रतिमा सबसे अलग है।  हमने आज तक जितने भी बालाजी के मंदिर में मूर्तियां देखी है उन सभी पर बालाजी के चेहरों पर सिंदूर लगा हुआ होता है परंतु Salasar Balaji के मंदिर पर बालाजी की मूर्ति पर दाढ़ी और मूंछ है जो कि सिर्फ सालासर धाम में ही है।

यहां पर पूर्णिमा के दिन लाखों करोड़ों श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर आते हैं।  यहां के मंदिर मे एक विशाल पेड़ पर नारियल बांधकर अपनी मनोकामना मांगते हैं। यह मंदिर 230 साल पुराना है और यहां की मान्यता बहुत ही ज्यादा है। आज हर कोई व्यक्ति सालासर धाम जाने की अभिलाषा रखता है।

Salasar balaji की कथा

सालासर बालाजी की कथा बहुत ही प्रसिद्ध है।  यह राजस्थान के सीकर जिले में एक रूल्याणी गांव है जहां पर लच्छीराम जी पाटोदिया का सबसे छोटा पुत्र मोहनदास का जन्म हुआ था जो कि बालाजी के बहुत ही बड़े भक्त थे।

वह हर समय हर दिन हर पल बालाजी के सत्संग और पूजा-अर्चना में लगे रहते थे और कहा जाता है कि मोहन दास जी की छोटी बहन कन्ही की शादी भी सालासर गांव में हुई थी ।

कुछ महीनों के बाद में उनकी बहन के  एक लड़का हुआ था।  जिसका नाम उदय था। उदय के जन्म के कुछ समय बाद में ही उदय के पिता की मृत्यु हो गई थी। जब इस बात का पता चला तो मोहन दास जी ने अपनी बहन और भांजे के साथ में उनका हाथ बंटाने के लिए खेती करने सालासर आकर रहने लगे।

जब उनकी मेहनत और लगन से काम शुरू हुआ तो उनकी बहन का खेत जैसे मानो सोना उगलने  लग गया हो।  दिन धीरे-धीरे बीते गए और मोहन दास जी बालाजी की भक्ति करते गए।  लोग उन्हें पागल समझने  लगे थे।

लोग कहते थे कि मोहनदास जी का विवाह करा देते हैं ताकि सब कुछ ठीक हो जाएगा जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला कि जिस कन्या से उनके विवाह की बात चल रही है तो उस कन्या की मृत्यु हो जाती थी और कहीं बार ऐसा हुआ था।

जिस भी कन्या के साथ में मोहन दास जी के रिश्ते की बात चलती थी उसकी अचानक से मृत्यु हो जाती थी क्योंकि मोहन दास जी ने ब्रह्मचर्य का पालन करने का वचन लिया था और हमेशा बालाजी के भजन कीर्तन में ही लीन रहते थे।

अचानक से एक चमत्कार हुआ और जाट की खेत में बालाजी की मूर्तियां निकली जो कि मोहन दास जी के सपने में पहले ही आ चुकी थी और धीरे-धीरे करके सालासर धाम का निर्माण हुआ।

Salasar Dham बस से कैसे जाएं

सालासर धाम जाने के लिए दिल्ली से रोजाना डीटीसी की बसें और हरियाणा से रोडवेज बस से और राजस्थान से रोडवेज बसें चलाई जाती है।  यहां पर सरकारी बसों का किराया ₹207 रखा गया था और प्राइवेट बसें हमेशा 500 से 1000 500 रुपए लेती है।

व्यक्ति को जयपुर से सालासर की बस लेनी होती है।  सालासर की बसें जयपुर से मिल जाती है।  यहां पर सरकारी बसें और निजी बसे  दोनों मिलती है यहां से एक्सप्रेस बस भी जाती है।

बीकानेर और उसके आसपास के शहरों से भी सालासर धाम जाया जा सकता है।  यहां पर बहुत सी राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा बसें चलाई जाती है।

Salasar रेल से कैसे जाएं

सालासर बालाजी जाने के लिए रेल की सुविधाएं नहीं है परंतु सालासर बालाजी के आसपास की स्थानों पर रेल की सुविधा दी गई है जैसे कि सुजानगढ़, रतनगढ़, सीकर, डीडवाना, लक्ष्मणगढ़, जयपुर, रतनगढ़, आदि शहरों पर रेल मार्ग द्वारा जा सकते हैं।

यहां से आपको बहुत सी बसें मिल जाएगी और बहुत सी टैक्सियों मिल जाएगी। रतनगढ़ से सालासर धाम 50  किलोमीटर है, सुजानगढ़ से 26 किलोमीटर डीडवाना से 45 किलोमीटर लक्ष्मणगढ़ से 33 किलोमीटर और सीकर से 55 किलोमीटर पड़ता है आप यहां जाने के लिए टैक्सी या प्राइवेट बसों द्वारा जा सकते हैं।

Salasar balaji फ्लाइट से कैसे जाएं

दूर देश से आने वाले लोगों के लिए सालासर धाम जाने के लिए फ्लाइट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं परंतु सालासर धाम एक गांव है जहां पर एयरपोर्ट की व्यवस्था नहीं है परंतु सालासर बालाजी से कुछ ही दूरी पर हवाई अड्डे हैं जैसे कि जयपुर।

जयपुर  सालासर धाम से कुछ घंटों की दूरी पर है।  यहां पर व्यक्ति फ्लाइट द्वारा आ सकता है फिर जयपुर से राजस्थान रोडवेज बसें और प्राइवेट बसें चलती है।

जयपुर से सालासर धाम 210 किलोमीटर है।  यहां पर पहुंचने के लिए 3 घंटे का समय लगता है।

 

Salasar Balaji  जाने के लिए बहुत से लोग हर साल आते हैं परंतु आसपास के गांवों के लोग हर साल और कई बार तो हर दिन लोग वहां पर दर्शन करने के लिए जाते हैं।

गांव के आसपास के लोग हर रोज बालाजी मंदिर की आरती का आनंद लेते हैं।  यहां पर हर दिन रामनाम का जाप होता ही रहता है यह सबसे प्रसिद्ध और श्रद्धालुओं का पसंदीदा हनुमान मंदिर है।

 

 

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